Wednesday, 15 April 2020

भारतरत्न डॉ.आंबेडकर के जन्मदिवस पर डॉ.पूनम तुषामड़ की कविता


महापुरुष 

नहीं !आप नहीं हैं
कोई देव पुरुष ,मसीहा
या कोई अवतार.
ये सब तो हैं धर्म सत्ता 
का ढोल पीटने वालों के 
हथियार .
बाबा साहेब...
आप ईश्वर तो बिलकुल 
भी नहीं हैं 
क्योंकि ईश्वर ??
कमजोरों से बोला 
सबसे शक्तिशाली 'झूठ' है.
जिसकी पैरवी करने को 
रचे गए सदियों से न जाने 
कितने झूठे धर्म ग्रन्थ,वेद 
और पुराण .
इसअस्तित्व विहीन ईश्वर 
के नाम से छली कपटियों ने 
कभी छल से तो कभी बल 
से बनाया निशाना, किया शिकार   
निरीह ,निहथ्यों का .

बाबा साहेब !
आप केवल मानव हैं .
मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण
मनुष्य जो है सृष्टि की 
सर्वश्रेष्ठ रचना .
जिसने सीखा है सभ्यता के 
गर्भ से ही सदा 
श्रम,संघर्ष और सामजिक 
संगठन.
जो बदल सकता है
अपनी चेतना शक्ति,शिक्षा 
व ज्ञान के बल पर 
सदियों पुरानी,फूहड़ 
जर्जर वर्णव्यवस्था को 
पलट सकता है 
मठाधीशों,पोंगापंडितों की
धर्मसत्ता,फूंक सकता है 
'मनुस्मृति'.
जो जगा सकता है 
चेतना और आत्मविशास 
सदियों से दलित,उपेक्षित 
अस्मिताओं में .
बाबा साहेब 
आपने दी कमजोरों को 
ताकत 
बेजुबानो को ज़ुबान ,
आपने दिए सबको समान हक़ 
सड़क से संसद तक 
बना दिया मार्ग जनमानस का  
लिखकर सर्व समतामूलक 
'विशाल संविधान'  
जय भीम 

डॉ.पूनम तुषामड़

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